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रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए राष्ट्रीय पोर्टल की शुरुआत

भारत में सभी तक सौर ऊर्जा पहुंचाने के लिये सबसे प्रभावी उपकरण क्या है? भारत मार्च 2026 तक 40GW रूफटॉप सोलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने प्रयासों को कैसे तेज कर सकता है? क्या भारतीय घरों में रूफटॉप सोलर काफ़ी लोकप्रिय है? ये कुछ ऐसे सवाल है, जो अक्सर हर किसी के मन में आते हैं।

इन सवालों का समाधान करने के लक्ष्य से और लोगों द्वारा रूफटॉप सोलर सिस्टम के उपयोग को बढ़ाने में मदद करने के लिए, भारत सरकार ने संपूर्ण सोलर सब्सिडी कार्यक्रम की शुरुआत करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने 30 जुलाई, 2022 को रूफटॉप सोलर फ़ेज़ II के लिए नया और बेहतरीन कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम के तहत एक राष्ट्रीय सोलर पोर्टल बनाया गया है, जिसके माध्यम से कोई भी भारतीय उपभोक्ता सोलर नेट मीटरिंग और सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकता है।

प्रधानमंत्री के शब्दों में, “बिजली बचाना, देश सजाना!” अर्थात् बिजली बचाकर हम अपने देश के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। इस ब्लॉग में हम इस कार्यक्रम और इससे होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

हमें इस नई पॉलिसी की आवश्यकता क्यों है?

सरकार का मुख्य उद्देश्य घरों में अधिक से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम के उपयोग को बढ़ाना था। ऐसा करने के लिए, सरकार लोगों को कुछ नक़द सहायता या सब्सिडी की पेशकश भी कर रही थी। लोगों को इस योजना का लाभ मिल सके,, इसकी पूरी ज़िम्मेदारी हर राज्य की बिजली कंपनियों और DISCOM को दी गई थी। जो लोग अपने घर में छत पर 10kW (किलोवॉट) तक का सोलर सिस्टम लगवाना चाहते थे, उन्हें 20% या 40% की सब्सिडी देने का प्रावधान था। लोगों के बीच रूफटॉप सोलर सिस्टम का उपयोग बढ़ सके, इसके लिए राज्य बिजली कंपनियों द्वारा सब्सिडी दी जाती थी, जहां वे सर्वोत्तम कीमतों पर सिस्टम प्रदान करते थे।

हालांकि, इस कार्यक्रम को लागू करने में कई चुनौतियां थीं, जिसकी वजह से कई उपभोक्ताओं को सब्सिडी योजना का लाभ नहीं मिल पाया। इतनी अच्छी कैपिटल सब्सिडी योजना के बावजूद काफ़ी कम लोगों ने अपने घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाया। पहले भारत में रूफटॉप सोलर सिस्टम का उपयोग काफ़ी कम क्यों था, इसके कुछ प्रमुख कारणों के बारे में नीचे बताया गया है:

मूल रूप से, रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए लोगों को मिलने वाली सब्सिडी, सोलर टेंडर में मिलने वाली सबसे कम कीमत या MNRE द्वारा निर्धारित दरों तक सीमित थी। ऐसा इसलिए होता था, क्योंकि सोलर टेंडर में विभिन्न कारणों से रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए वास्तव में कम कीमतें दिखाई गई थीं।

इसका एक कारण यह भी था कि उन्होंने MNRE द्वारा निर्धारित दरों को बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हुए एक सीमा लगा दी थी कि आप रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए कितना शुल्क ले सकते हैं। समस्या यह थी कि ये दरें वास्तविक लागतों के के हिसाब से सही नहीं थी, क्योंकि उनकी कीमतें लगभग एक साल तक समान ही थीं, जबकि सिस्टम में उपयोग होने वाली चीजों की कीमतें उस दौरान काफ़ी महंगी हो चुकी थीं।

इसकी वजह से, विक्रेताओं ने काफ़ी कम कीमतें दीं और टेंडर दरों से अलग चालान बनाकर ग्राहकों से सहमत दरों से ज़्यादा कीमतें वसूल की। इसका नुक़सान यह हुआ कि लोगों को घटिया क्वॉलिटी के सोलर सिस्टम मिले और योजना के अनुसार प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया।

पहले उपभोक्ताओं  के पास चुनाव करने का विकल्प नहीं था। अन्य चीजों की तरह ही रूफटॉप सोलर सिस्टम की एक बड़ी श्रृंखला पेश की जानी चाहिए थी, ताकि उपभोक्ता अपनी ज़रूरत के हिसाब से उसका चयन कर पाते। उदाहरण के लिए, स्ट्रिंग इन्वर्टर v/s माइक्रो इन्वर्टर, सिस्टम की ऊंचाई, छत की जगह को उपयोगी और सुंदर बनाने के लिए छत को पेर्गोला के रूप में डिज़ाइन करने का विकल्प, वॉटरप्रूफ रूफटॉप सोलर सिस्टम, ताकि उसे बारिश के समय में भी उपयोग किया जा सके और सोलर टाइल्स आदि का विकल्प। 

उपरोक्त समस्याओं को हल करने के लिए, राष्ट्रीय सोलर पोर्टल उन लोगों के लिए वरदान के रूप में सामने आया, जो अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं। आइये जानें कैसे…

इस योजना की ख़ास बातें:

इस राष्ट्रीय सरलीकृत योजना के तहत, सरकार द्वारा सब्सिडी की राशि निम्नलिखित स्लैब के अनुसार तय की गई है, जो भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मान्य है।

एक बार जब मीटरिंग सिस्टम चालू हो जाए और सुचारू रूप से चलने लगे, और डिस्कॉम (DISCOM) उसे अप्रूव कर दे, तब उसके बाद CFA/सब्सिडी जारी की जाएगी।

CFA/सब्सिडी की गणना कुल सोलर मॉड्यूल क्षमता, सोलर इन्वर्टर की क्षमता या DISCOM द्वारा अप्रूव क्षमता जो भी कम हो, के आधार पर की जाएगी।

DISCOM को टेंडर निकालने, कीमतें तय करने और विक्रेताओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं है। साथ ही, विक्रेताओं को मंत्रालय से सब्सिडी राशि के लिए इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा। इसकी बजाय, वे पूरी राशि सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते से प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि उपभोक्ता को सीधे उनके बैंक अकाउंट में सब्सिडी मिलती है।

इस योजना के लाभ:

यह योजना एक डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफ़र (DBT) योजना है, जिसमें उपभोक्ताओं को उनके छत पर सोलर सिस्टम लगाने और चालू होने के 30 दिनों के भीतर उनके बैंक अकाउंट में सब्सिडी मिल जाएगी।

इस योजना की सबसे ख़ास बात यह है कि इसके लिये मुफ़्त में ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है, उपभोक्ता इस DBT योजना के तहत अपने DISCOM में लिस्ट की गई किसी भी सोलर कंपनी को चुन सकते हैं, और किसी भी समय राष्ट्रीय सोलर पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।

इस योजना के तहत सरकार उपभोक्ताओं के फ़ायदे के लिए तत्पर है। जो भी विक्रेता इस योजना के तहत सोलर सिस्टम बेचना चाहते हैं, उन्हें DISCOM में ख़ुद को रजिस्टर कराना होगा और कम से कम 5 सालों तक रूफटॉप सोलर सिस्टम का रखरखाव करना होगा।

इस योजना के तहत अधिकतम बिक्री मूल्य हो हटा दिया गया है और ग्राहकों को बेहतरीन विकल्प भी दिया गया है। यानी अब ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से रूफटॉप सोलर सिस्टम चुन सकते हैं और उसमें बदलाव कर सकते हैं।

सब्सिडी गणना पैरामीटर:

सिस्टम क्षमता उपलब्ध सब्सिडी
3kW तक   ₹14,588/kW
3kW से ज़्यादा और 10kW तक पहले 3kW के लिए ₹14,588/kW; उसके बाद, ₹7294/kW
10kW से ज़्यादा ₹94,822 फ़िक्स

 

* वित्तीय डेटा (जैसे मूल्य निर्धारण, निवेश पर रिटर्न) आदि के साथ दी गई दूसरी सभी जानकारी आपको केवल समझाने के लिए है और यह पूरी तरह से सटीक नहीं है। वित्तीय सलाह के लिए कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें। फेनिस एनर्जी का वित्तीय सलाह देने का कोई इरादा नहीं है और इसके लिये कंपनी ज़िम्मेदार भी नहीं है।

सब्सिडी से जुड़ी 3 मुख्य बातें:

आप MNRE द्वारा अप्रूव भारत में निर्मित पैनलों का उपयोग करके अपने सोलर सिस्टम के लिए सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।

यह केवल ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम और हाइब्रिड सोलर सिस्टम के लिए उपलब्ध है।

अगर आप अपने घर के लिये सोलर सिस्टम लेना चाहते हैं, तो 10kW तक के आवासीय सोलर सिस्टम के लिए सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। 

सब्सिडी के बाद सोलर सिस्टम की कुल अनुमानित लागत:

क्षमता अनुमानित लागत

(सब्सिडी से पहले)

लागू सब्सिडी अनुमानित लागत

(सब्सिडी के बाद)

3kW ₹2,00,000 ₹43,764 ₹1,56,236
4kW ₹2,50,000 ₹51,058 ₹1,98,942
5kW ₹3,00,000 ₹58,540 ₹2,41,460
10kW ₹6,00,000 ₹94,822 ₹5,05,178

 

*नोट: उपरोक्त गणना में टैक्स नहीं जोड़ा गया है।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy – MNRE) आपकी स्थानीय बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के निरीक्षण के 30 दिनों के भीतर सब्सिडी सीधे आपके बैंक अकाउंट में भेजता है। इसके लिए अब न ही आपको लंबा इंतज़ार करने की ज़रूरत है और न ही इसमें कोई परेशानी है। इस तरह अब बिना किसी परेशानी के स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।

* वित्तीय डेटा (जैसे मूल्य निर्धारण, निवेश पर रिटर्न) आदि के साथ दी गई दूसरी सभी जानकारी आपको केवल समझाने के लिए है और यह पूरी तरह से सटीक नहीं है। वित्तीय सलाह के लिए कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से बात करें। फेनिस एनर्जी का वित्तीय सलाह देने का कोई इरादा नहीं है और इसके लिये कंपनी ज़िम्मेदार भी नहीं है।

सोलर कंपनियों को इस सब्सिडी योजना के अंतर्गत मिलने वाला लाभ:

जो भी सोलर कंपनी, इस सब्सिडी योजना के अंतर्गत सोलर सिस्टम बेचना चाहती है, उसे ₹2.5 लाख की बैंक गारंटी देकर DISCOM में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। ऐसा करके कंपनी राष्ट्रीय सब्सिडी योजना के तहत उस DISCOM में उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए पात्र हो जाती है।

विक्रेताओं को राष्ट्रीय पोर्टल पर अपनी जानकारी और कीमतें प्रदान करने की सुविधा मिलती है। इससे जो लोग भी रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं, वह विक्रेताओं को संपर्क कर सकते हैं और आपसी सहमति के बाद तय की गई कीमतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं।

निष्कर्ष:

भारतीय सोलर इंडस्ट्री के लिए सरकार का यह कदम बेहद ही शानदार है। यह नई पॉलिसी सौर ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे सोलर सिस्टम की मांग बढ़ेगी, विक्रेताओं को अधिक विकल्प मिलेगा और बेहतरीन सोलर सिस्टम ख़रीदने की आज़ादी होगी। साथ ही इस योजना की वजह से ज़्यादा से ज़्यादा सोलर कंपनियां जुड़ेंगी, जिससे सरकार का अधिक से अधिक सोलर सिस्टम के उपयोग को बढ़ावा देने वाली अपनी योजना को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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