A Deep Dive into Time of Day Tariffs in India
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टाइम ऑफ डे टैरिफ़: भारत में विद्युत क्रांति की शुरुआत 

समय के साथ ऊर्जा की खपत में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। इस कारण इसमें रोज़ाना बदलाव देखने को मिल रहे हैं और ये भारतीय उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग और पेमेंट के तरीक़े को भी बदल रहा है। वर्तमान में इसका नेतृत्व करने वाले विचार को टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ़ कहा जाता है। इस संरचना के अंतर्गत उपयोग के आधार पर कीमत बदलती रहती है, जो पूरे दिन उतार-चढ़ाव वाली मांग और ऊर्जा उपलब्धता के साथ बिजली की लागत को सिंक करती है। इस ब्लॉग के माध्यम से हम टाइम ऑफ डे टैरिफ़ सिस्टम की बारीकियों, इसके दूरगामी प्रभावों, उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभों और स्मार्ट मीटरिंग तकनीकी की मुख्य भूमिका के बारे में विस्तार से जानेंगे।

टाइम ऑफ डे टैरिफ़ क्या होता है?

टाइम ऑफ डे टैरिफ़, मुख्य रूप से एक मूल्य निर्धारण तंत्र है, जो खपत के समय के आधार पर बिजली की लागत को समायोजित करता है। जहां, पारंपरिक फ़्लैट-रेट टैरिफ़ में उपभोक्ता असीमित बिजली का उपयोग करने के बावजूद एक निश्चित कीमत का भुगतान करते हैं, वहीं, टाइम ऑफ डे टैरिफ़ अंर्तगत पूरे दिन कीमतें बदलती रहती हैं।

स्मार्ट मीटरिंग की भूमिका:

टाइम ऑफ डे टैरिफ़ का जन्म भारत में स्मार्ट मीटरिंग तकनीक के उदय से जुड़ा हुआ है। पारंपरिक ऊर्जा मीटरों की तुलना में स्मार्ट मीटर काफ़ी आधुनिक हैं, क्योंकि ये उन्नत उपकरण हैं, जो वास्तविक समय में ऊर्जा खपत को रिकॉर्ड करते हैं और इस डेटा को सेवा प्रदाताओं को वापस भेजते हैं। यह दो तरफ़ा संरचना बिजली के उपयोग की सटीक निगरानी रखने में सक्षम बनाता है और बिना किसी रुकावट के टाइम ऑफ डे टैरिफ़ के एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है। 

उपभोक्ता विद्युत अधिकार 2020 (Electricity Rights of Consumers 2020):

साल 2020 में भारत में विद्युत मंत्रालय ने एक नज़र रखने वाले तंत्र, उपभोक्ता विद्युत अधिकार की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं को सशक्त बनाना और बिजली की दक्षता को बढ़ाना है। इस ऐतिहासिक विनियमन के प्रमुख प्रावधानों में टाइम ऑफ डे टैरिफ़ को अपनाने पार ज़ोर दिया गया। टाइम ऑफ डे टैरिफ़ को उपभोक्ताओं को बिजली संसाधनों का अधिक समझदारी से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने और ग्रिड दोनों को लाभ पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

घरों के साथ ही व्यावसायिक और औद्योगिक प्रभाव:

टाइम ऑफ डे टैरिफ़ का प्रभाव घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है। विशेष समय के दौरान काम करने वाले व्यवसाय रणनीतिक रूप से अपने ऊर्जा उपयोग को ऑफ-पीक अवधि के साथ मैच करके लागत में बचत कर सकते हैं। यह रणनीतिक दृष्टिकोण न केवल व्यवसायों के लिए आर्थिक रूप से महत्व रखता है, बल्कि पीक आवर्स के दौरान ग्रिड पर पड़ने वाले ज़्यादा भार को कम करके स्थिरता को भी बढ़ावा देता है।

कार्रवाई में विनियमन – राज्य विद्युत नियामक आयोग (Regulation in action – State Electricity Regulatory Commission)

टाइम ऑफ डे टैरिफ को अपनाना और लागू करना भारत में राज्य विद्युत नियामक आयोगों के दायरे में आता है। नियम बनाने वाली संस्थाएं तय करती हैं कि आप बिजली के लिए कितना भुगतान करेंगे। साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि यह राज्य द्वारा तय किए गये ऊर्जा लक्ष्यों से भी मेल खाए। टाइम ऑफ डे टैरिफ के अंतर्गत बिजली की कीमत आपके उपयोग के समय के आधार पर बदल सकती है। इसलिए बिजली का उपयोग तभी करें, जब बहुत जरुरी हो। इस तरह आप पैसे बचा सकते हैं और पर्यावरण को बोझ से भी बचा सकते हैं।

सूर्य की शक्ति का उपयोग, दिन के समय ToD शुल्क:

भारत में टाइम ऑफ डे टैरिफ का एक विशिष्ट पहलू सौर घंटों यानी दिन के समय जब सौर ऊर्जा उत्पादन चरम पर होता है की मान्यता भी है। इन घंटों के दौरान, बि जली की लागत कम हो जाती है, जो भारतीय ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की अधिकता को दर्शाता है। यह न केवल स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत में सौर प्रतिष्ठानों की आर्थिक विजीविलिटी का भी समर्थन करता है।

टाइम ऑफ डे टैरिफ से उपभोक्ताओं को होने वाले लाभ:

टाइम ऑफ डे टैरिफ प्रणाली भारतीय उपभोक्ताओं को कई लाभ प्रदान करती है:

1.लागत में बचत: अपने ऊर्जा उपयोग को ऑफ-पीक घंटों में समायोजित करके, उपभोक्ता कम टैरिफ से लाभ उठा सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बिजली बिल कम हो सकती है।

2. चुनाव की आज़ादी: टाइम ऑफ डे टैरिफ उपभोक्ताओं को बिजली का उपयोग करते समय चुनने की आज़ादी प्रदान करता है, जिससे उन्हें मूल्य निर्धारण भिन्नताओं के आधार पर सही निर्णय लेने में आसानी होती है।

3. दोबारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा को बढ़ावा देना: टाइम ऑफ डे टैरिफ का एकीकरण उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से आकर्षित बनाकर सौर ऊर्जा जैसे दोबारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा स्रोतों के उपयोग का समर्थन करता है।

4. स्मार्ट खपत: स्मार्ट मीटर की सहायता से, उपभोक्ता अपने वास्तविक समय के ऊर्जा उपयोग को ट्रैक कर सकते हैं और अपने उपभोग पैटर्न को अनुकूलित करने के लिए सही विकल्प चुन सकते हैं।

टाइम ऑफ डे टैरिफ में दोबारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा की भूमिका:

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्यों के साथ टाइम ऑफ डे टैरिफ का संरेखण (Allignment) इस अभिनव मूल्य निर्धारण संरचना का एक प्रमुख पहलू है। सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन अक्सर पूरे दिन अलग-अलग पैटर्न का पालन करते हैं। इन विविधताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए टैरिफ को समायोजित करके, टाइम ऑफ डे टैरिफ स्वच्छ, टिकाऊ बिजली स्रोतों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है और भारत में हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करता है।

जून 2023 और उससे आगे की स्थिति:

जून 2023 के बाद से टाइम ऑफ डे टैरिफ भारत के सभी क्षेत्रों में काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है। केंद्रीय मंत्री द्वारा इन गतिशील मूल्य निर्धारण संरचनाओं का समर्थन, ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और भारतीय उपभोक्ताओं को ग्रिड में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने के वादे को दर्शाता है। टाइम ऑफ डे टैरिफ के पीछे की गति अधिक प्रतिक्रियाशील और उपभोक्ता-केंद्रित ऊर्जा की संभावना की ओर बदलाव का संकेत देती है।

चुनौतियां और भविष्य की राह पर विचार:

हालांकि, टाइम ऑफ डे टैरिफ के अनेकों लाभ हैं, इसके बाद भी भारत में इसे लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। स्मार्ट मीटरों को व्यापक रूप से अपनाना, उपभोक्ता शिक्षा पहल, और पीक आवर्स के दौरान नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की विश्वसनीयता के बारे में चिंताओं को संबोधित करना उन विचारों में से हैं, जिन पर हितधारकों को ध्यान देना चाहिए। भविष्य में टाइम ऑफ डे टैरिफ प्रणाली में सुचारू और प्रभावी परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए इन चुनौतियों को हल करने पर भी ध्यान देना होगा।

निष्कर्ष: बेहतर भविष्य के लिए हरित कल को अपनाना:

अंत में, टाइम ऑफ डे टैरिफ प्रणाली भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का उपभोग करने और उसके लिए भुगतान करने के तरीके में एक आदर्श बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल टिकाऊ ऊर्जा की दिशा में वैश्विक प्रयास के अनुरूप है, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को ऐसे विकल्प चुनने में सशक्त बनाता है, जो उनकी जेब और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद हों। स्मार्ट मीटर की स्थापना इस परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है, जो वास्तविक समय डेटा प्रदान करता है और भारत में अधिक प्रतिक्रियाशील और कुशल बिजली ग्रिड की सुविधा प्रदान करता है।

जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, नियामक निकायों, उपयोगिता प्रदाताओं और भारतीय उपभोक्ताओं के बीच निरंतर सहयोग टाइम ऑफ डे टैरिफ की पूरी क्षमता को अनलॉक करने और भारत में ऊर्जा खपत के अधिक टिकाऊ और लागत प्रभावी युग की शुरुआत करने के लिए आवश्यक होगा। विद्युत क्रांति की शुरुआत हो चुकी है, और दिनों-दिन हम हरित और उज्जवल भविष्य की ओर एक कदम और आगे बढ़ रहे हैं।

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